पलटू साहिब के पूर्वज संत
‘पलटू साहिब के पूर्वज संत’ पुस्तक बावरी साहिबा से आरंभ होनेवाली गुरु-शिष्य परंपरा में पलटू साहिब से पूर्व के सात संतों के जीवन और उपदेश पर आधारित है। इन संतों के नाम हैं: यारी साहिब, बुल्ला साहिब, गुलाल साहिब, भीखा साहिब, जगजीवन साहिब, दूलनदास जी तथा गोविन्द साहिब। प्रभुप्राप्ति के लिए नामभक्ति का महत्त्व समझाते हुए इस पुस्तक में आध्यात्मिक जागृति की प्रेरणा दी गई है। इन संतों ने मनुष्य देह को प्रभु की अद्भुत रचना कहा है जिसमें आध्यात्मिकता का भंडार भरा है। इसका भेद सतगुरु से प्राप्त होता है। उनके मार्गदर्शन में आंतरिक अभ्यास करने पर सच्चा प्रेम और विरह जाग्रत होता है तथा आंतरिक जगत का प्रवेशद्वार खुल जाता है।
लेखक: डॉ. टी. आर. शंगारीऑनलाइन ऑर्डर के लिए: भारत से बाहर के देशों में ऑर्डर के लिए भारत में ऑर्डर के लिए डाउन्लोड (361MB) | यू ट्यूब |
- प्रकाशक की ओर से
- लेखक की ओर से
- जीवन परिचय
- उपदेश – भाग 1
- उपदेश – भाग 2
- उपदेश – भाग 3
- उपदेश – भाग 4
- उपदेश – भाग 5
- उपदेश – भाग 6
- उपदेश – भाग 7
- उपदेश – भाग 8
- उपदेश – भाग 9
- उपदेश – भाग 10
- चुनी हुई वाणी - भाग 1
- चुनी हुई वाणी - भाग 2
- चुनी हुई वाणी - भाग 3
- चुनी हुई वाणी - भाग 4
- चुनी हुई वाणी - भाग 5
- चुनी हुई वाणी - भाग 6
- उपसंहार
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‘पलटू साहिब के पूर्वज संत’ पुस्तक बावरी साहिबा से आरंभ होनेवाली गुरु-शिष्य परंपरा में पलटू साहिब से पूर्व के सात संतों के जीवन और उपदेश पर आधारित है। इन संतों के नाम हैं: यारी साहिब, बुल्ला साहिब, गुलाल साहिब, भीखा साहिब, जगजीवन साहिब, दूलनदास जी तथा गोविन्द साहिब। प्रभुप्राप्ति के लिए नामभक्ति का महत्त्व समझाते हुए इस पुस्तक में आध्यात्मिक जागृति की प्रेरणा दी गई है। इन संतों ने मनुष्य देह को प्रभु की अद्भुत रचना कहा है जिसमें आध्यात्मिकता का भंडार भरा है। इसका भेद सतगुरु से प्राप्त होता है। उनके मार्गदर्शन में आंतरिक अभ्यास करने पर सच्चा प्रेम और विरह जाग्रत होता है तथा आंतरिक जगत का प्रवेशद्वार खुल जाता है।
लेखक: डॉ. टी. आर. शंगारी