सन्तमत दर्शन
पुस्तक के पहले भाग में हुज़ूर महाराज चरन सिंह जी के ग्यारह सत्संग संक्षेप में दिए गए हैं और उसके बाद हुज़ूर महाराज जी द्वारा पश्चिमी सत्संगियों और जिज्ञासुओं को 1952 और 1958 के बीच लिखे गए लगभग 400 पत्रों में से लिए गए उदाहरण हैं। सत्संगों में हुज़ूर ने पिछले पूर्ण संतों के बताए विश्वव्यापक मूलभूत सत्यों को दैनिक जीवन से लिए गए उदाहरणों और वृत्तांतों द्वारा खोलकर समझाया है। पत्रों में हुज़ूर दैनिक जीवन की व्यावहारिक समस्याओं के बारे में और भजन-सुमिरन तथा अंतर में आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के संबंध में परामर्श तथा प्रोत्साहन देते हैं।
लेखक: महाराज चरन सिंह जीऑनलाइन ऑर्डर के लिए: भारत से बाहर के देशों में ऑर्डर के लिए भारत में ऑर्डर के लिए डाउन्लोड (319MB) | यू ट्यूब |
- प्रकाशक की ओर से
- सुरत सुन बात री
- किन बिधि मिलै गुसाई मेरे राम राए
- देखो सब जग जात बहा
- मन खिन खिन भरम भरम बहु धावै
- दिल का हुजरा साफ़ कर
- गुरु कहें खोल कर भाई
- रामा रम रामो सुन मन भीजै
- तजो मन यह दुख सुख का धाम
- उलटा कूवा गगन में
- आतम मह राम राम मह आतम
- साहिब के दरबार में केवल भक्ति पियार
- भाग - 2 हुज़ूर महाराज चरन सिंह 1952 से 1958 द्वारा लिखे गए पत्र
- पत्र 001 से 025
- पत्र 026 से 050
- पत्र 051 से 075
- पत्र 076 से 100
- पत्र 101 से 125
- पत्र 126 से 150
- पत्र 151 से 175
- पत्र 176 से 200
- पत्र 201 से 225
- पत्र 226 से 250
- पत्र 251 से 275
- पत्र 276 से 300
- पत्र 301 से 325
- पत्र 326 से 350
- पत्र 351 से 372
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पुस्तक के पहले भाग में हुज़ूर महाराज चरन सिंह जी के ग्यारह सत्संग संक्षेप में दिए गए हैं और उसके बाद हुज़ूर महाराज जी द्वारा पश्चिमी सत्संगियों और जिज्ञासुओं को 1952 और 1958 के बीच लिखे गए लगभग 400 पत्रों में से लिए गए उदाहरण हैं। सत्संगों में हुज़ूर ने पिछले पूर्ण संतों के बताए विश्वव्यापक मूलभूत सत्यों को दैनिक जीवन से लिए गए उदाहरणों और वृत्तांतों द्वारा खोलकर समझाया है। पत्रों में हुज़ूर दैनिक जीवन की व्यावहारिक समस्याओं के बारे में और भजन-सुमिरन तथा अंतर में आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के संबंध में परामर्श तथा प्रोत्साहन देते हैं।
लेखक: महाराज चरन सिंह जी