जलालुद्दीन रूमी: मसनवी
जलाल अल-दीन रूमी, जो ‘रूमी’ के नाम से मशहूर हैं, तेरहवीं सदी के एक जाने-माने सूफ़ी शायर हुए हैं। फ़ारसी साहित्य के लिए उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान है उनकी शायरी, ख़ासतौर पर उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना, उनका मशहूर महाकाव्य, ‘मसनवी’। इसमें छह अलग-अलग दफ़्तर हैं, जिनमें 25,632 शे'र दर्ज हैं। यह पुस्तक रूमी की मसनवी के कुछ अंशों का संकलन है। इसमें रूमी बहुत-से ख़ूबसूरत क़िस्से-कहानियों के ज़रिये अपना गूढ़ संदेश पेश करते हैं।
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विषय-सूची और ऑडियो ट्रैक्स
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- दफ़्तर 4 भाग 1
- दफ़्तर 4 भाग 2
- दफ़्तर 4 भाग 3
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- दफ़्तर 5 भाग 2
- दफ़्तर 5 भाग 3
- दफ़्तर 6 भाग 1
- दफ़्तर 6 भाग 2
सुनने संबंधी सुझाव एवं जानकारी
स्वतः वहीं से प्रारंभ: ऑडियो प्लेयर इस ब्राउज़र और डिवाइस पर आपके सुनने की स्थिति को स्वतः याद रखता है, जिससे आप एक सप्ताह के भीतर पुनः वहीं से सुनना शुरू कर सकते हैं जहाँ आपने छोड़ा था।
प्लेयर के विकल्प: स्क्रीन पर दिए गए बटनों की सहायता से आप ऑडियो को 15 सेकंड आगे या पीछे कर सकते हैं, सुनने की गति (0.85x–1.5x) बदल सकते हैं, या 10 अथवा 20 मिनट बाद ऑडियो बंद करने के लिए स्लीप टाइमर सेट कर सकते हैं।
स्क्रीन बंद होने पर व ऑफ़लाइन सुनना: अपने फ़ोन पर बिना किसी रुकावट के लगातार सुनने के लिए, यूट्यूब प्लेलिस्ट लिंक खोलें या सीधे अपने डिवाइस में ऑडियो सेव करने के लिए डाउन्लोड लिंक पर टैप करें।