संक्षेप में सत्य
आदि में शब्द था और शब्द परमात्मा के पास था, और शब्द ही परमात्मा था। आदि में वही परमात्मा के साथ था। सब कुछ उसी ने रचा; जो कुछ रचा गया उसमें से कुछ भी ऐसा नहीं है, जो उसने न रचा हो।
गॉस्पल ऑफ़ सेंट जॉन 1:1
***
सबका आदि और अन्त शब्द है। सब स्थूल तत्त्व, आकाश आदि, सूक्ष्म तत्त्व या तन्मात्रा शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गन्ध सब शब्द ही हैं। जो कुछ है शब्द ही है, इसलिए उससे जो कुछ प्रकट हो वह भी शब्द के सिवाय और क्या हो सकता है। शब्द हमें पैदा करनेवाला है, वह हमारा आधार है। हम शब्द के हैं और शब्द हमारा है। गुरुवाणी बतलाती है कि शब्द कुल-मालिक है।
महाराज सावन सिंह जी, गुरुमत सिद्धान्त, भाग पहला
***
१ओ सत नाम करता पुरख निरभउ निरवैर अकाल मूरत अजूनी सैभं गुर प्रसाद॥
जपुजी साहिब