अंतिम शब्द
अखंड नाम साधना है
याद प्रभु की आती रहे, अजपा-जाप चलता रहे,
सिमरन नाम का करते-करते, हो जाएगा मन शांत ये।
सुबह शाम हो या दोपहर, नितनेम से दिनभर,
सिमरन नाम का हर पल करते रहें हम।
सुख हो या फिर दुख हो साथ, शुभ अवसर हो या हो अशुभ,
समय हो आराम का या फिर हो रात, चलता रहे नाम का जाप।
चलते-फिरते, करते हुए काम, खाते, पीते या करते हुए आराम,
नाना भोग भोगते हुए, बिसर न जाए प्रभु का नाम।
सुख हो या हो संकट का दौर, कैसा भी हो समय का फेर,
कुछ भी हो छूट न जाए, करो निरंतर नाम का जाप।
बचपन हो या आए जवानी, हो बुढ़ापा या फिर कोई परेशानी,
जीवन भर भी और अंत समय भी, चलता रहे नाम का जाप।
करते रहो नाम का जाप, देह का पुण्य यही तू जान,
पर्वत जैसे दोष महान, काटे सहज ही राम-नाम।
चारों वर्ण हैं नाम के अधिकारी, छोटा या बड़ा नहीं है नामी।
मूर्ख भी हो जाए पार, मिल जाए जो नाम का आधार।
स्वर अनेक, गीत एक