संक्षेप में सत्य
आपको अपने कर्मों का भुगतान ख़ुद करना है। जब कोई व्यक्ति जंगल में जाता है, अगर उसके हाथ में कोई बंदूक या तलवार हो, तो वह किसी भी जंगली जानवर का सामना निडरता से कर सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जिसने उस व्यक्ति को बंदूक या तलवार दी है, वही आकर जंगली जानवरों से छुटकारा दिलवाने में उसकी सहायता करे। आपको भजन-सिमरन करने की युक्ति बता दी गयी है। आपको अपनी सहायता ख़ुद करनी है। आपको अपने सारे प्रारब्ध कर्मों का भुगतान करने के लिये अपनी इच्छाशक्ति को मज़बूत करना है। कुछ हद तक सतगुरु भी आपकी सहायता करते हैं, लेकिन असल में आपको भजन-सिमरन के द्वारा अपनी मदद ख़ुद करनी है।
महाराज चरन सिंह जी, संत संवाद, भाग 2
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दाओवादियों का मानना है कि हमारा भविष्य हमारे ही हाथों में है। भाग्य पिछले जन्म के कर्मों का फल है। इसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन हम अपना भविष्य बदल सकते हैं।
इंट्रोडक्शन टू द दाओ
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अपने असली स्वरूप की पहचान करने के लिए जब हम संतों के बताए मार्ग पर चलने का इरादा पक्का कर लेते हैं तो सबसे पहले हमें इस बात को पूरी तरह से स्वीकार करना है कि हमें अपने हर कर्म और विचार का फल भोगना पड़ेगा…
हमारा वर्तमान हमारे पिछले विचारों और कर्मों का फल है। कर्म और कर्मफल के नियमानुसार हमारा भविष्य हमारे आज के विचारों और कर्मों द्वारा तय किया जाएगा। इस समय हम अपनी निर्मल बुद्धि और विवेक द्वारा अपने जीवन के हर पल का इस्तेमाल इस तरह कर सकते हैं कि हमें न केवल इस जीवन में, बल्कि अनंत काल तक इसका फ़ायदा मिले।…
भजन-सुमिरन को अपने जीवन में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बनाने में देर क्यों करें? भजन-सुमिरन के लिए यदि हम आज कोशिश नहीं करेंगे तो फिर कब करेंगे? हमें अपने आप से पूछना है कि अगर मैं भजन-सुमिरन नहीं करूँगा तो मेरी जगह और कौन करेगा?
हउ जीवा नाम धिआए