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रूहानी रिश्ता
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इस संसार से उखाड़ लिए जाना
अगर किसी पेड़ की जड़ें ज़मीन में बहुत गहरी हैं और आप उस पेड़ को उखाड़ना चाहते हैं तो आपको बहुत तेज़ हवा की ज़रूरत है। आपको जड़ों को ढीला करने के लिए उन्हें गीला भी करना होगा ताकि तेज़ हवा आसानी से अपना काम कर सके। पिछले जन्मों के कर्मों के कारण इस दुनिया में हमारी बहुत सारी जड़ें फैली हुई हैं। हम इस दुनिया के सुखों में इतने डूबे हुए हैं कि जब तक संत हमें जड़ों से नहीं हिलाते, हम इस दुनिया से ख़ुद को कभी नहीं उखाड़ पाएँगे। इसलिए वे कभी-कभी बहुत कड़े क़दम उठाते हैं; मैं कहूँगा कि उनका तरीक़ा बहुत, बहुत सख़्त होता है क्योंकि वे हमें इस दुनिया से उखाड़ कर पिता के पास वापस ले जाना चाहते हैं। एक छोटा पेड़ जिसकी जड़ें गहरी नहीं होती, उसे हल्की-सी हवा भी गिरा सकती है। लेकिन जिन पेड़ों की जड़ें बहुत मज़बूत, लंबी और ज़मीन में गहरी होती हैं, उन्हें एक बहुत ख़ास हवा की ज़रूरत होती है और उन्हें उखाड़ने से पहले बहुत ज़्यादा पानी और नमी की ज़रूरत होती है।
महाराज चरन सिंह जी, संत संवाद, भाग 1
भाग 22 • अंक 3
24 अक्तूबर, 1972 …
हुज़ूर महाराज चरन सिंह जी अनमोल ख़ज़ाना पुस्तक में फ़रमाते हैं, “प्रेम की गहराई को जानने के लिए प्रियतम का वियोग आवश्यक है।” …
सरदार बहादुर जगत सिंह जी के हाथ से लिखे पत्रों में से कुछ अंश नीचे दिए गए हैं। …
क़ैद दो तरह की होती है: एक वह जब हमें पता होता है कि हम क़ैद में हैं; दूसरी वह जब हमें यह पता ही नहीं होता। …
जब मैं अपने लैपटॉप पर टाइप कर रही थी तो मुझे अपने फोन पर एक ई-मेल नोटिफिकेशन और फिर एक टेक्स्ट मैसेज की बीप सुनाई दी। …
राधास्वामी मत के संस्थापक स्वामी जी महाराज अपने सतगुरु के आगे विनती करते हैं …
उन्होंने सफ़ेद सूती कुर्ता पजामा पहना हुआ था। सूरज की रोशनी को उनसे प्यार हो गया …
ज़रा सोचिए: हम पूरी ज़िंदगी कड़ी मेहनत करते हैं और एक खाते में पैसे जमा करते हैं ताकि रिटायर होने पर या जब सच में ज़रूरत हो तब हम उसका इस्तेमाल कर सकें …
हममें से कुछ लोगों का सेवा के प्रति मिला-जुला दृष्टिकोण है। हम सेवा करना चाहते हैं लेकिन कभी-कभी हममें वैसा उत्साह नहीं …
शब्द “धुनात्मक प्रकाश” है, आवाज़ और प्रकाश का संगम है। यह रूहानी शक्ति की धारा है जोकि सतगुरु का असल स्वरूप है। …
इनसानों में एक गहरी, क़ुदरती तड़प होती है जो सिर्फ़ परमात्मा के मिलाप से ही पूरी हो सकती है। …
जन्म-जन्म से, रूहें हमारी, कर्म-क़ानून से बँधी, जगत में भटकें मारी-मारी। …
हमारी इस ज़िंदगी का मक़सद क्या है? संत-महात्मा हमें समझाते हैं कि हमें मनुष्य शरीर इसलिए मिला है ताकि हम परमात्मा से रिश्ता क़ायम कर सकें …
अगर किसी पेड़ की जड़ें ज़मीन में बहुत गहरी हैं और आप उस पेड़ को उखाड़ना चाहते हैं तो आपको बहुत तेज़ हवा की ज़रूरत है …