उसके प्रेम के साँचे में ढले
हमारी भावनात्मक मज़बूती और आत्म-विश्वास की बुनियाद उन लोगों द्वारा बनाई जाती है जो हमारे जीवन के शुरुआती वर्षों में हमारी परवरिश करते हैं। गहराई से अध्ययन करने पर यह तथ्य सामने आया है कि अगर बचपन में हमारी परवरिश बिना नुक़्ताचीनी के तथा प्रेम-प्यार से की जाती है तो मुश्किल हालात से उबरने की हमारी क्षमता और आत्म-विश्वास बढ़ने लगता है। वहीं अगर हमें वह प्यार और सहारा नहीं मिलता तो हम असुरक्षित व डरपोक बन जाते हैं और हम आसानी से हार मान लेते हैं।
रूहानी मार्ग पर चलते हुए, सतगुरु का प्रेम ही हमारे जीवन को सही दिशा देता है, हमें सहारा और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। आज अगर हम कोई भी क़ुर्बानी देने और कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं; अगर हम नए जगत की खोज करने के लिए अपने ‘कम्फर्ट ज़ोन’ से बाहर निकलने का साहस रखते हैं तो उसकी वजह सिर्फ़ यह है कि सतगुरु का प्रेम हमें ऐसा करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
हम सब ने कई तरह से उनके प्रेम को अनुभव किया है – मुश्किल समय में उनका मार्गदर्शन, बार-बार पूछे जानेवाले एक ही तरह के सवालों का धैर्यपूर्वक जवाब देना, हमारे लिए उनकी प्यारी-सी मुस्कान और उनकी प्यार-भरी दृष्टि। इस तरह के अनुभव शिष्य को बहुत कुछ सिखाते हैं।
सतगुरु का प्रेम हमें ख़ुशी देता है, हमें उम्मीद देता है और हमारे अंदर ऐसी गहरी लगन या जुनून पैदा कर देता है कि हमें पता भी नहीं चलता कि कब हम अपनी कमज़ोरियों और कमियों के बावजूद, उस पूर्ण प्रेम को पाने के सपने देखने लगते हैं और इसके लिए संघर्ष और कुछ भी क़ुर्बान करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
रूमी ने सतगुरु को ‘साक़ी’ कहा है क्योंकि वह अपने दिल के जाम से मदहोश कर देने वाले दिव्य प्रेम के आनंद को शिष्य के दिल में उड़ेल देता है। एक बार जब हम उस प्रेम का अनुभव कर लेते हैं तो फिर हमारा किसी दूसरी चीज़ से संतुष्ट होना बहुत मुश्किल हो जाता है।
यह मुनासिब नहीं कि साक़ी तुझ-सा हो और हम होश में रहें!
जलाल अल-दीन रूमी
बेशक़ इसका मतलब यह नहीं कि हमें अपने रूहानी सफ़र में कभी भी बेबसी और निराशा का सामना नहीं करना पड़ता लेकिन सतगुरु का प्रेम हमें लगातार संघर्ष करते रहने की प्रेरणा देता है। चाहे हमें यह पसंद हो या न हो, चाहे हमें इस बात का एहसास हो या न हो, हमारी आत्मा बलवान हो रही है और हम सच्चे प्रेमी बनना सीख रहे हैं– ऐसे प्रेमी जो थोड़ी-सी मुश्किल आने पर न तो कोशिश करना छोड़ते हैं और न ही हिम्मत हारते हैं।
हे ईसा! यदि तुमसे प्रेम करने की इच्छा ही इतनी आनंददायक है तो उस प्रेम को पाना और उसका आनंद लेना कितना सुखद होगा? मेरे जैसी अपूर्ण आत्मा पूर्ण प्रेम को पाने की आकांक्षा कैसे कर सकती है?…मैं बाज़ नहीं हूँ, मेरे पास सिर्फ़ उस जैसी आँखें और दिल है। बहुत अधिक तुच्छ होने के बावजूद, मैं उस दिव्य सूर्य, प्रेम के सूर्य को देखने का साहस करती हूँ और मेरा दिल अपने भीतर बाज़ की सारी आकांक्षाओं को महसूस करता है।…फिर इसका क्या होगा? क्या यह ख़ुद को इतना बेबस महसूस करते हुए दु:ख से मर जाएगा? अरे नहीं! इस छोटे-से पक्षी को तो कोई परेशानी भी नहीं होगी। पूरे समर्पण के साथ, यह अपने दिव्य सूर्य को निहारते रहना चाहता है। इसे कुछ भी डरा नहीं पाएगा, न हवा, न बारिश और यदि काले बादल आकर प्रेम के उस सितारे को छिपा लें, तो भी यह छोटा-सा पक्षी अपनी जगह से नहीं हिलेगा क्योंकि इसे पता है कि बादलों के उस पार उसका सूर्य अब भी चमक रहा है।
लिसिएक्स की सेंट थेरेसी, स्टोरी ऑफ़ ए सोल
प्रेम होने पर सब कुछ बहुत सहज हो जाता है। एक प्रेमी मुश्किल से मुश्किल कार्य को भी बड़ी आसानी से कर लेता है। प्रेम से नामुमकिन कार्य भी मुमकिन हो जाता है। प्रेम हर डर को बाहर निकाल देता है।
हज़रत मुहम्मद के साथी कवच के बग़ैर
जंग के मैदान में कूद गए।
वे उनके इश्क़ के नशे में पूरी तरह मस्त और मदहोश थे।
जलाल अल-दीन रूमी
मन के साथ हमारा संघर्ष लगातार जारी रहता है; यह हमें बार-बार इंद्रियों की ओर खींचता है, यह मार्ग के प्रति हमारी दृढ़ता को लेकर संदेह पैदा करता है, यह हमारे अंदर डर पैदा करता है, इसकी वजह से ही हम मायूस और बेचैन रहते हैं। दूसरी ओर अपने सतगुरु की संगति में होनेवाले अनुभव – उनका साथ, उनकी प्यार-भरी देखभाल और उनकी रूहानी शक्ति – यक़ीन मानिए कि सब कुछ हमारे हित में है।
बेक़रार करने वाली तेरे इश्क़ की आग में,
मैंने बहुतों को बेक़रार मगर साकिन देखा है।
जलाल अल-दीन रूमी
मन हमारे ध्यान को तीसरे तिल से भटकाता रहता है मगर इसके बावजूद हम स्थिर होकर बैठने और भजन-सिमरन के लिए निश्चित समय देने की कोशिश करते हैं। क्या ऐसा इसलिए नहीं है कि हम अपने सतगुरु की ख़ुशी प्राप्त करना चाहते हैं? क्या उनका प्रेम ही हमारी प्रेरणा का स्रोत नहीं है?
सतगुरु का प्रेम ही हमें भजन-सिमरन करने के लिए प्रेरित करता है। भजन-सिमरन करने की हर छोटी से छोटी कोशिश हमारी आत्मा की क़ामयाबी में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है जिससे हम साहसी, प्रसन्नचित्त और दृढ़ निश्चयी बन जाते हैं।
जो आशिक़ कोशिश करते हैं,
उन पर हर लम्हा महबूब तोहफ़े निसार करता है।
वही है दिलो-जान रूह की
जो जान डाल देता है दिल में, इश्क़ के।
जलाल अल-दीन रूमी
कभी-कभी हो सकता है कि हम सतगुरु को याद न करें और शारीरिक तौर पर हम अपने प्रियतम से जुदा हों लेकिन उनका प्रेम सदा क़ायम रहता है। सतगुरु का प्रेम सच्चा और नि:स्वार्थ होता है।
ऐ शम्से-तब्रीज़ी, अल्फ़ाज़ नहीं हैं तुझे बयान करने के लिए –
सिवा इसके कि, ख़ुदा क़सम, क्या ख़ूब यार है तू,
क्या ख़ूब यार है तू!
जलाल अल-दीन रूमी
जीवन के उतार-चढ़ाव की वजह से अगर हम कभी हिम्मत हारकर निराश हो जाएँ तो सिर्फ़ उनके प्रेम को याद करें – जो उनकी अपार दया-मेहर से हम पर बरस रहा है भले ही हम उसके लायक़ न हों।
हाँ, मेरे प्रियतम, इसी प्रकार मेरा जीवन समर्पित होगा। आपके प्रति अपने प्रेम को साबित करने का मेरे पास और कोई ज़रिया नहीं है, सिवाय फूल बिखेरने के –यानी एक छोटा-सा बलिदान भी हाथ से न जाने देना, एक नज़र, एक शब्द भी नहीं; छोटी से छोटी बात का लाभ उठाना और उन्हें प्रेम के साथ करना…चाहे मुझे काँटों के बीच में से फूल इकट्ठा करने पड़ें, मैं फिर भी गाती रहूँगी और मेरा गीत उतना ही सुरीला होगा, जितने बड़े और तीखे वे काँटे होंगे।
लिसिएक्स की सेंट थेरेसी, स्टोरी ऑफ़ ए सोल