याद रखने योग्य कथन
सतगुरु कभी अपने शिष्य का साथ नहीं छोड़ते और हमेशा उस पर दया-मेहर करते रहते हैं, चाहे शिष्य को इसका आभास न भी हो।
महाराज चरन सिंह जी, सन्तमत दर्शन
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साधक को सत्य ग्रहण करना चाहिए और असत्य से बचने का प्रयत्न करना चाहिए। हरएक काम सोच-विचार कर करना चाहिए। वह कोई ऐसा काम न करे जिससे बाद में पछताना पड़े।
महाराज सावन सिंह जी, गुरुमत सार
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कथनी करनी जाकी एक समाना, रहें शांत-चित्त वे सदा सुजाना,
ज्ञान बसै उनके उर-अंतर, पर वे रहें सदा विनम्र।
कोई करे आलोचना या आराधना –
न वे मानें अपमाना, न ही मानें दु:ख भारी।
संत एकनाथ
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तेज़ शस्त्र से शरीर पर किया गया घाव तो समय पाकर भर जाता है, पर ज़बान द्वारा इनसान के दिल पर किया गया ज़ख़्म कभी नहीं भरता। कभी किसी जीव का दिल न दुखाओ। इस बात को भी उतना ही ज़रूरी समझना चाहिए जितने ज़रूरी मांस आदि न खाने के वे प्रण हैं जो हम नामदान के समय लेते हैं।
सरदार बहादुर जगत सिंह जी, आत्म-ज्ञान