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रूहानी रिश्ता
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नए साल का संदेश
आप ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। ज्ञान आपके अन्दर है। शब्द-धुन ही वह ज्ञान है। आप इसका अभ्यास जितना ज़्यादा करेंगे उतने ही ज़्यादा ऊँचे जायेंगे और ज्ञानी बनेंगे। यह ज्ञान सचखण्ड में जाकर पूर्ण होता है। इसलिए पहले आप सुमिरन के ज़रिये ख़याल को समेटिए और अन्दर लाइए। तीसरे तिल में बैठिए और घण्टे की आवाज़ को पकड़िए और इसके सहारे पाँचवें मण्डल (सचखण्ड) तक पहुँचिए। यह मार्ग शुरू में लम्बा और नीरस लग सकता है, लेकिन इसके अलावा कोई दूसरा मार्ग नहीं है। परमात्मा एक है और उससे मिलने की राह भी एक ही है और वह है – शब्द-धुन।
रास्ता आपके अन्दर है, शब्द-धुन ही वह सीधी सड़क है। ख़ुद परमात्मा हमारे अन्दर है। जो अन्दर गये हैं सिर्फ़ वे ही इस बात को समझ सकते हैं और इसकी क़द्र कर सकते हैं। अन्य लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। नाम के सुमिरन के ज़रिये फैले हुए मन को अन्दर लाइए और गुरु की मदद से शब्द-धुन को पकड़िए तथा मन और माया के देश को पार करके अपने घर सचखण्ड पहुँच जायें, जहाँ हमेशा आनन्द ही आनन्द है।
सिर्फ़ इनसान को ही ऊपर जाने का अधिकार है। किसी दूसरे जीव को, यहाँ तक कि देवी देवताओं को भी यह हक़ हासिल नहीं है। इनसान सृष्टि का सिरमौर (अशरफ़-उल-मख़्लूक़ात) है। इसलिए वक़्त का हर एक पल क़ीमती है और इनसान का यह फ़र्ज़ है कि वह अपने वक़्त का सही इस्तेमाल करे। सिर्फ़ इस राह में बिताये गये वक़्त का ही लेखा होता है। नये साल के मौक़े पर मेरा यही सन्देश है कि आपसे जितनी ज़्यादा हो सके शब्द की कमाई कीजिए, ताकि आप ख़ुद ईसा मसीह के दर्शन करें। शब्द आपको स्थायी शान्ति तथा आनन्द के धाम में पहुँचा देगा।
महाराज सावन सिंह जी, परमार्थी पत्र, भाग 2
भाग 22 • अंक 1
आप ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। ज्ञान आपके अन्दर है। शब्द-धुन ही वह ज्ञान है। …
हम इस दुनिया में ख़ुश नहीं हैं, यही कारण है कि हम तितली बनने का सपना देखते हैं – यही वजह है कि आत्मा मुक्त होने का सपना देखती है। …
हमारा शरीर एक कोट के समान है जो जन्म के समय हमें काल से मिला था; एक दिन हमें इसे वापस लौटाना पड़ेगा। …
यह प्रश्न अकसर पूछा जाता है कि पूर्ण सतगुरु की पहचान कैसे की जाए? …
जब मन में प्रेम के साथ सतगुरु याद आ गए, तो सब काम – परमार्थी और दुनिया के – अच्छे लगेंगे, मन में कोई तकलीफ़ नहीं होगी …
सिर्फ़ इसलिए कि हम बिना गैजेट्स, किताबों या कागज़ात के किसी कोने में चुपचाप बैठे हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि भजन-बंदगी …
महाराज सावन सिंह जी द्वारा की गई व्याख्या …
निस्स्वार्थ सेवा संतमत की रूहानी शिक्षाओं का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। दरअसल, सभी आध्यात्मिक मार्ग अपने शिष्यों को किसी भी रूप में …
जीवन के उतार-चढ़ाव के बावजूद ख़ुश रहना एक आदर्श रूहानी जीवन की पहचान है। …
महाराज चरन सिंह जी के साथ हुए चुनिंदा सवाल-जवाब …
सच्चा रूहानी मार्ग प्रकाश का मार्ग है। परमात्मा का सार और हमारी आत्मा का सार भी निर्मल प्रकाश ही है। …
हम अकसर अपनी ज़मीन-जायदाद, धन-संपत्ति को ही अपनी दौलत मानते हैं। …
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ऐ ग़ाफ़िल रूह, जाग और पहचान अपने असल को। तू कोयले का टुकड़ा नहीं, बल्कि चमकता हीरा है। …
21वीं शताब्दी में जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसमें अपने ध्यान को एकाग्र करना मुश्किल होता जा रहा है। …
हैवन ऑन अर्थ से उद्धरित …
गुरु नानक देव जी के बारे में एक जानी-मानी साखी है। गुरु साहिब ने कुछ लोगों को गंगा में नहाते हुए देखा। …
एक दिन सूर्य और गुफ़ा में बातचीत हुई। दोनों ने एक-दूसरे से ख़ैरियत पूछी और अपने रोज़मर्रा के जीवन के बारे में बातचीत की। …
एक बार किसी ने महाराज जी से विनती की कि आप अपने परिवार, विशेष तौर पर अपने पिता जी के बारे में …