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रूहानी रिश्ता
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विचार करने योग्य
हमारा शरीर एक कोट के समान है जो जन्म के समय हमें काल से मिला था; एक दिन हमें इसे वापस लौटाना पड़ेगा। जो चीज़ किसी से उधार ली गई है, उसे वापस करते हुए हमें कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिये। सत्संगी को इससे कहीं अच्छी अवस्था में जाना है। इस मोटे कोट से कहीं अच्छे वस्त्र पहनना है, तो फिर उसे टाट के वस्त्रों के बदले मख़मल का कोट लेने में घबराना क्यों चाहिये! और फिर अगर सत्संगी ने अपनी ज़िन्दगी में इस अन्तिम दिन के लिये तैयारी कर ली है, तो वह इस वस्त्र बदलने की घड़ी में कोई दु:ख नहीं उठाता, बल्कि एक दूल्हे के समान प्रसन्न रहता है।
महाराज सावन सिंह जी, प्रभात का प्रकाश
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व्यापार में तथा जीवन के अन्य क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। परंतु चिंता ने कभी किसी का कुछ नहीं सँवारा। प्रत्येक समस्या को निजी अनुभव, सांसारिक सूझबूझ तथा प्रेम और विश्वास से ही सुलझाना उचित है।
सरदार बहादुर जगत सिंह जी, आत्म-ज्ञान
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तारा-मण्डल, सूर्य और चन्द्र को पार करके उस स्थान पर पहुँचने से पहले भी, जहाँ सतगुरु के नूरी स्वरूप का मिलाप होता है, कभी-कभी सतगुरु अपनी दया-मेहर से हमें दर्शन दे देते हैं। यह सब उनकी दया-मेहर पर निर्भर करता है। परन्तु इस महान् वरदान को हमेशा के लिये प्राप्त करने के लिये हमें तारा मण्डल, सूर्य और चन्द्र को पार करना होगा। ये नियम और क़ानून हम पर लागू होते हैं, सतगुरु पर नहीं। वे हमें जब चाहें दर्शन दे सकते हैं। एक चिथड़ों में लिपटा दरिद्र भिखारी अपनी मर्ज़ी से बादशाह के महल में नहीं जा सकता, पर बादशाह को अपने महल से उतरकर भिखारी की झोंपड़ी में जाने से कोई नहीं रोक सकता।
महाराज चरन सिंह जी, दिव्य प्रकाश
भाग 22 • अंक 1
आप ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। ज्ञान आपके अन्दर है। शब्द-धुन ही वह ज्ञान है। …
हम इस दुनिया में ख़ुश नहीं हैं, यही कारण है कि हम तितली बनने का सपना देखते हैं – यही वजह है कि आत्मा मुक्त होने का सपना देखती है। …
हमारा शरीर एक कोट के समान है जो जन्म के समय हमें काल से मिला था; एक दिन हमें इसे वापस लौटाना पड़ेगा। …
यह प्रश्न अकसर पूछा जाता है कि पूर्ण सतगुरु की पहचान कैसे की जाए? …
जब मन में प्रेम के साथ सतगुरु याद आ गए, तो सब काम – परमार्थी और दुनिया के – अच्छे लगेंगे, मन में कोई तकलीफ़ नहीं होगी …
सिर्फ़ इसलिए कि हम बिना गैजेट्स, किताबों या कागज़ात के किसी कोने में चुपचाप बैठे हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि भजन-बंदगी …
महाराज सावन सिंह जी द्वारा की गई व्याख्या …
निस्स्वार्थ सेवा संतमत की रूहानी शिक्षाओं का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। दरअसल, सभी आध्यात्मिक मार्ग अपने शिष्यों को किसी भी रूप में …
जीवन के उतार-चढ़ाव के बावजूद ख़ुश रहना एक आदर्श रूहानी जीवन की पहचान है। …
महाराज चरन सिंह जी के साथ हुए चुनिंदा सवाल-जवाब …
सच्चा रूहानी मार्ग प्रकाश का मार्ग है। परमात्मा का सार और हमारी आत्मा का सार भी निर्मल प्रकाश ही है। …
हम अकसर अपनी ज़मीन-जायदाद, धन-संपत्ति को ही अपनी दौलत मानते हैं। …
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ऐ ग़ाफ़िल रूह, जाग और पहचान अपने असल को। तू कोयले का टुकड़ा नहीं, बल्कि चमकता हीरा है। …
21वीं शताब्दी में जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसमें अपने ध्यान को एकाग्र करना मुश्किल होता जा रहा है। …
हैवन ऑन अर्थ से उद्धरित …
गुरु नानक देव जी के बारे में एक जानी-मानी साखी है। गुरु साहिब ने कुछ लोगों को गंगा में नहाते हुए देखा। …
एक दिन सूर्य और गुफ़ा में बातचीत हुई। दोनों ने एक-दूसरे से ख़ैरियत पूछी और अपने रोज़मर्रा के जीवन के बारे में बातचीत की। …
एक बार किसी ने महाराज जी से विनती की कि आप अपने परिवार, विशेष तौर पर अपने पिता जी के बारे में …