बेहद ज़रूरी
हम इस दुनिया में ख़ुश नहीं हैं, यही कारण है कि हम तितली बनने का सपना देखते हैं – यही वजह है कि आत्मा मुक्त होने का सपना देखती है। हम इस जीवन रूपी सपने में क्यों रहना चाहेंगे जब हम ‘दाओ’ में अनंत काल तक रहने का आनंद प्राप्त कर सकते हैं?
इंट्रोडक्शन टू द दाओ
अपने जीवन को संत-महात्माओं के उपदेश के अनुसार ढालने के लिए समय और दृढ़ संकल्प का होना ज़रूरी है ताकि हम हर पल रूहानी जीवन जी सकें। शिष्य होने के नाते अपने स्रोत में वापस समाने के लिए हमने इस मार्ग को चुना है और इस यात्रा के लिए अपनी अपेक्षाओं को नियंत्रित करना भी ज़रूरी है। हम कर्मों के परिणाम से बच नहीं सकते, हमें शारीरिक और मानसिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। चूंकि दाओ या शब्द में विलीन होने से पहले बाक़ी बचे सभी कर्मों के हिसाब-किताब को चुकता करना आवश्यक है, इसलिए हमारी वापसी की यात्रा कठिन और कष्टदायक हो सकती है, भले ही ऊपरी तौर पर यह आसान दिखाई दे।
बहुत-से क़ैदी जेल में अपना समय समाज में वापस शामिल होने की तैयारी में बिताते हैं जैसे कि वे आगे पढ़ाई करते हैं, नए कौशल सीखते हैं, अपने प्रियजनों के साथ नाता मज़बूत करते हैं और उनका विश्वास जीतते हैं। अगर वे जेल में अपना समय रिहा होने के बाद अगले अपराध करने की योजना बनाने में बिता दें तो हम उन्हें मूर्ख ही समझेंगे। इसी तरह, यदि हम भजन-बंदगी करके हमेशा के लिए दुनिया के आवागमन के चक्र से मुक्ति पाने के बजाय जन्म-मरण के इस बंदीख़ाने में अपना जीवन उन गतिविधियों में बिताते हैं जो हमें यहीं बाँधे रखती हैं तो हमें समझदार कौन कहेगा?
मन को स्थिर करने और अपने कर्मों का भुगतान करने के लिए आजीवन किया जानेवाला संघर्ष हमें कईं बार हताश कर देता है ख़ासकर तब, जब कोई राहत नज़र नहीं आती। जहाँ कुछ लोग संघर्ष करना छोड़ देते हैं वहीं रूहानियत के मार्ग पर चलने वाले साधक आत्मसमर्पण कर देते हैं। संघर्ष करना छोड़ देने का मतलब है हार मान लेना जबकि आत्मसमर्पण में हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करने के बाद सतगुरु के आगे समर्पण कर देते हैं कि अब मैं सब कुछ आप पर छोड़ता हूँ। जैसे कि कहा जाता है, परमात्मा हमें वह नहीं देता जिसे हम सँभाल सकते हैं पर जो हमें दिया गया है उसे सँभालने में वह हमारी मदद करता है; इसलिए हमें इस विश्वास के साथ सुकून मिल सकता है कि अपने रूहानी अभ्यास में दृढ़ रहकर हम जन्म-मरण के इस चक्र से मुक्त होने की कोशिश कर सकते हैं। सच्चे दिल से की गई कोशिश हमारी रूह की तरक़्क़ी के लिए ज़रूरी है जैसा कि नीचे दी गई कहानी में बताया गया है।
एक महिला को तितली का कोकून मिला और उसने देखा कि तितली अपने शरीर को कोकून से बाहर निकालने की कोशिश में किस तरह संघर्ष कर रही थी। आख़िरकार तितली ने कोशिश करना बंद कर दिया मानो जितनी कोशिश वह कर सकती थी, कर चुकी थी, वह अब और कोशिश नहीं कर सकती थी। महिला ने तितली की मदद करने का फ़ैसला किया और एक कैंची लेकर कोकून को काट दिया ताकि तितली आसानी से बाहर आ सके। तितली बाहर तो निकल आई और महिला उसे उम्मीद-भरी नज़रों से देखने लगी कि वह अपने पंख फैलाएगी और उड़ेगी। मगर इसके बजाय तितली का शरीर सूजा हुआ था और उसके पंख छोटे और सिकुड़े हुए थे जो उसके शरीर को सँभालने के लिए न तो बढ़े और न ही फैले। नतीजा यह हुआ कि तितली को अपना बाक़ी का जीवन इधर-उधर रेंगते हुए बिताना पड़ा और वह कभी उड़ने के लायक़ नहीं हो पाई। लेकिन नेकनीयत होने पर भी वह महिला जल्दबाज़ी में यह नहीं समझ पाई कि कोकून के छोटे से छेद में से निकलने का संघर्ष तितली के लिए कितना ज़रूरी था। तितली के शरीर में से द्रव्य को उसके पंखों तक पहुँचाने के लिए यह क़ुदरत का तरीक़ा था ताकि जब वह उस कोकून से आज़ाद हो तो उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाए।
इसी तरह, हमारी रूहानी तरक़्क़ी के दौरान सतगुरु दया-मेहर करके हमारी सँभाल करते हैं ताकि हम अपनी वापसी की यात्रा के लिए काफ़ी मज़बूत बन सकें। कठिनाइयों रहित जीवन व्यक्ति को पंगु बना देता है। हमें उतने समय के लिए और उतनी ही शिद्दत से संघर्ष करना पड़ता है, जितना हमारे लिए ज़रूरी है लेकिन हमारे लिए अंतर में क्या कुछ किया जा रहा है हम उसको नहीं देख पाते। मुश्किलों के दौरान, हमें यह समझना चाहिए कि जो कुछ हो रहा है, वह हमारी रूहानी उड़ान के लिए हमारे पंखों को मज़बूती देगा। इसलिए यह पूरी प्रक्रिया बेहद ज़रूरी है।
दो लकड़ियाँ
जब आपस में रगड़ी जाती हैं, आग पैदा करती हैं;
आग के पास रखने पर, धातु पिघल जाती है;
गोल चीज़ें अकसर घूमती हैं,
खोखली चीज़ें अधिकतर तैरती हैं।
यह उनका सहज स्वभाव है।इसलिए, जब बसंत की हवाएँ आती हैं,
तो वे समय पर बारिश लाती हैं;
और असंख्य चीज़ें उत्पन्न होती हैं
और पोषित होती हैं।
पंखदार जीव सेते हैं
और अपने अंडों से बच्चों को जन्म देते हैं,
स्तनधारी जीव गर्भ धारण करते हैं और
अपनी संतान को जन्म देते हैं।
पौधे और पेड़ खिलते हैं, …
असल में ऐसा होते हुए किसी ने कभी नहीं देखा
फिर भी कार्य पूरा हो जाता है।
हुआइनान्ज़ी, इंट्रोडक्शन टू द दाओ से उद्धृत